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mahabharat 8.80.17-18h: गणिव धनुष से छूटे हुए नाना प्रकार के प्राण हरने वाले बाण अग्नि की किरण, उल्का और बिजली के समान चमकते हुए आपकी सेना को जलाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.80: अर्जुनका कौरव-सेनाको नष्ट करके आगे बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका कौरव-सेनाको नष्ट करके आगे बढ़ना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  8.80.17-18h 
नानारूपा: प्राणहरा: शरा गाण्डीवचोदिता:॥ १७॥
अलातोल्काशनिप्रख्यास्तव सैन्यं विनिर्दहन्।
 
 
अनुवाद
गणिव धनुष से छूटे हुए नाना प्रकार के प्राण हरने वाले बाण अग्नि की किरण, उल्का और बिजली के समान चमकते हुए आपकी सेना को जलाने लगे।
 
Various kinds of life-taking arrows shot from the Gānīva bow, shining like a ray of fire, a meteor and lightning, began to burn your army. 17 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)