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mahabharat 8.79.84: तब अश्वत्थामा ने क्रोध में भरकर दूसरा बहुमूल्य धनुष हाथ में लिया, जो रत्नों, हीरों और सुवर्ण से विभूषित था और जिसकी कांति तक्षक के शरीर के समान लाल थी, मानो उसने किसी विशाल अजगर को पर्वत की चोटी से उठा लिया हो।   |   mahabharat अध्याय 8.79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  8.79.84 
स रोषपूर्णो मणिवज्रहाटकै-
रलङ्कृतं तक्षकभोगवर्चसम्।
महाधनं कार्मुकमन्यदाददे
यथा महाहिप्रवरं गिरेस्तटात्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
तब अश्वत्थामा ने क्रोध में भरकर दूसरा बहुमूल्य धनुष हाथ में लिया, जो रत्नों, हीरों और सुवर्ण से विभूषित था और जिसकी कांति तक्षक के शरीर के समान लाल थी, मानो उसने किसी विशाल अजगर को पर्वत की चोटी से उठा लिया हो।
 
Then Ashvatthama, filled with anger, took up in his hand another precious bow, adorned with gems, diamonds and gold and having a reddish glow like that of Takshak's body, as if he had lifted a huge python from the edge of a mountain. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)