श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  8.79.81 
स गाण्डिवव्यायतपूर्णमण्डल-
स्तपन् रिपूनर्जुनभास्करो बभौ।
शरोग्ररश्मि: शुचिशुक्रमध्यगो
यथैव सूर्य: परिवेषवांस्तथा॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
सूर्यरूपी अर्जुन पूर्ण चक्राकार गाण्डीव धनुष को खींचे हुए, अपनी बाण के समान तीव्र किरणों से प्रकाशित होते हुए, शत्रुओं को संताप देते हुए, ज्येष्ठ और आषाढ़ मास के बीच चक्र से घिरे हुए सूर्य के समान शोभा पा रहे थे॥81॥
 
Arjuna in the form of the Sun, with the drawn Gandiva bow in the form of a full circle, shining with his arrow-like intense rays, tormenting the enemies, was looking beautiful like the Sun surrounded by a circle between the months of Jyestha and Ashadha. ॥ 81॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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