श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  8.79.78 
यथोग्ररश्मि: शुचिशुक्रमध्यग:
सुखं विवस्वान् हरते जलौघान्।
तथार्जुनो बाणगणान् निरस्य
ददाह सेनां तव पार्थिवेन्द्र॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
राजन! जिस प्रकार ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में सूर्यदेव अपनी प्रचण्ड किरणों से पृथ्वी के जलराशियों को सहज ही सोख लेते हैं, उसी प्रकार अर्जुन ने भी आपकी सेना पर बाणों का प्रहार करके उसे नष्ट करना आरम्भ कर दिया।
 
King! Just as the Sun God with his intense rays during the months of Jyestha and Ashadha effortlessly absorbs the water bodies of the earth, in the same way Arjuna began to destroy your army by attacking it with his arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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