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mahabharat 8.79.77: कुंतीपुत्र ने मुस्कुराते हुए कौरव योद्धाओं के श्रेष्ठ बाणों को अपने बाणों से काट डाला। उनका गाण्डीव धनुष खींचे जाने पर पूर्णतः गोलाकार हो गया और वे उससे शत्रु सैनिकों पर बार-बार बाणों से प्रहार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  8.79.77 
शरोत्तमान् सम्प्रहितान् महारथै-
श्चिच्छेद पार्थ: प्रहसन् शरौघै:।
भूयश्च तानहनद् बाणसङ्घान्
गाण्डीवधन्वायतपूर्णमण्डल:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
कुंतीपुत्र ने मुस्कुराते हुए कौरव योद्धाओं के श्रेष्ठ बाणों को अपने बाणों से काट डाला। उनका गाण्डीव धनुष खींचे जाने पर पूर्णतः गोलाकार हो गया और वे उससे शत्रु सैनिकों पर बार-बार बाणों से प्रहार करने लगे।
 
The son of Kunti smilingly cut off the best arrows shot by the Kaurava warriors with his own arrows. His Gandiva bow, when drawn, became completely circular and with it he repeatedly attacked the enemy soldiers with arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)