श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 69-70h
 
 
श्लोक  8.79.69-70h 
मनोरथो यस्तु ममाद्य तस्य
मद्रेश युद्धं प्रति पाण्डवस्य।
नैतच्चिरादाशु भविष्यतीद-
मत्यद्भुतं चित्रमतुल्यरूपम्॥ ६९॥
एतौ च हत्वा युधि पातयिष्ये
मां वापि कृष्णौ निहनिष्यतोऽद्य।
 
 
अनुवाद
मद्रराज! अर्जुन के साथ युद्ध के विषय में मेरी आज की इच्छा शीघ्र ही पूर्ण होगी। यह युद्ध अत्यंत अद्भुत, विचित्र एवं अद्वितीय होगा। मैं युद्धभूमि में उन दोनों का वध करूँगा अथवा वे दोनों मेरा वध करेंगे। 69 1/2।
 
Madraraj! My desire today regarding the war with Arjuna will be fulfilled immediately and soon. This war will be extremely wonderful, strange and unique. I will kill both of them on the battlefield or both of them will kill me. 69 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)