श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 66-67
 
 
श्लोक  8.79.66-67 
भयं मे वै जायते साध्वसं च
दृष्ट्वा कृष्णावेकरथे समेतौ॥ ६६॥
अतीव पार्थो युधि कार्मुकिभ्यो
नारायणश्चाप्रति चक्रयुद्धे।
एवंविधौ पाण्डववासुदेवौ
चलेत् स्वदेशाद्धिमवान् न कृष्णौ॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण और अर्जुन को रथ पर मिलते देखकर मुझे बहुत भय लगता है, मेरा हृदय भयभीत हो जाता है। अर्जुन युद्ध में समस्त धनुर्धरों से श्रेष्ठ हैं और चक्र युद्ध में तो नारायण रूपी भगवान कृष्ण का भी कोई मुकाबला नहीं है। पाण्डुपुत्र अर्जुन और वसुदेवनन्दन श्री कृष्ण दोनों ही इतने पराक्रमी हैं। हिमालय भले ही अपने स्थान से हिल जाए; परन्तु दोनों कृष्ण अपनी मर्यादा से विचलित नहीं हो सकते।
 
Seeing Shri Krishna and Arjun meeting on a chariot, I feel very scared, my heart gets scared. Arjuna is superior to all the archers in the war and even Lord Krishna in the form of Narayana is no match in the Chakra war. Both Pandu's son Arjun and Vasudevanandan Shri Krishna are so mighty. Even if the Himalayas move from their place; But both Krishnas cannot deviate from their dignity.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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