| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस » श्लोक 65-66h |
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| | | | श्लोक 8.79.65-66h  | अनन्तवीर्येण च केशवेन
नारायणेनाप्रतिमेन गुप्त:।
वर्षायुतैर्यस्य गुणा न शक्या
वक्तुं समेतैरपि सर्वलोकै:॥ ६५॥
महात्मन: शङ्खचक्रासिपाणे-
र्विष्णोर्जिष्णोर्वसुदेवात्मजस्य। | | | | | | अनुवाद | | जो हाथ में शंख, चक्र और तलवार धारण करते हैं, जो विष्णुस्वरूप हैं, विजयी हैं, वसुदेवपुत्र महात्मा भगवान श्रीकृष्ण हैं; उन असीम पराक्रमी, अतुलनीय, नारायण अवतार द्वारा अर्जुन की रक्षा की जाती है; जिनके गुणों का वर्णन समस्त लोक के लोग मिलकर भी दस हजार वर्षों में नहीं कर सकते॥65 1/2॥ | | | | Arjuna is protected by that infinitely mighty, incomparable, Narayana incarnation, who holds the conch, chakra and sword in his hands, the form of Vishnu, victorious, Mahatma Lord Shri Krishna, the son of Vasudeva; Whose qualities the people of the entire world together cannot describe even in ten thousand years. 65 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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