श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  8.79.62 
पृथक् पृथग्लोकपाला: समेता
ददुर्महास्त्राण्यप्रमेयाणि संख्ये।
यैस्ताञ्जघानाशु रणे नृसिंह:
सकालकेयानसुरान् समेतान्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
जगत के विविध रक्षकों ने आकर उसे ऐसे महान् अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए, जिनकी युद्धभूमि में कोई बराबरी नहीं थी। उन अस्त्रों से उस सिंहपुरुष ने समूह बनाकर आए हुए कालकेय नामक दैत्यों का शीघ्र ही नाश कर डाला ॥ 62॥
 
The various guardians of the world came and gave him such great weapons that there was no equal in the battlefield. With those weapons, that lion-man quickly destroyed the demons named Kalkeya who had come together in groups. ॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)