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mahabharat 8.79.61: वह महापुरुष जिसने अस्त्रों द्वारा महान् युद्ध करके स्वयं भगवान महादेव को प्रसन्न किया और उनसे पाशुपत नामक महान् अस्त्र प्राप्त किया, जो अत्यंत भयंकर है और तीनों लोकों का नाश करने में समर्थ है ॥ 61॥   |   mahabharat अध्याय 8.79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  8.79.61 
महादेवं तोषयामास योऽस्त्रै:
साक्षात् सुयुद्धेन महानुभाव:।
लेभे तत: पाशुपतं सुघोरं
त्रैलोक्यसंहारकरं महास्त्रम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
वह महापुरुष जिसने अस्त्रों द्वारा महान् युद्ध करके स्वयं भगवान महादेव को प्रसन्न किया और उनसे पाशुपत नामक महान् अस्त्र प्राप्त किया, जो अत्यंत भयंकर है और तीनों लोकों का नाश करने में समर्थ है ॥ 61॥
 
The great person who pleased Lord Mahadeva himself by fighting a great battle with weapons and obtained from him the great weapon called Pashupata which is extremely dreadful and capable of destroying the three worlds. ॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)