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mahabharat 8.79.60: उन्होंने इन्द्रलोक में जाकर कालकेय नामक असंख्य राक्षसों का वध किया और वहाँ देवदत्त नामक शंख प्राप्त किया; अतः इस पृथ्वी पर उनसे बढ़कर कौन है?   |   mahabharat अध्याय 8.79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  8.79.60 
तथेन्द्रलोके निजघान दैत्या-
नसंख्येयान् कालकेयांश्च सर्वान्।
लेभे शङ्खं देवदत्तं स्म तत्र
को नाम तेनाभ्यधिक: पृथिव्याम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने इन्द्रलोक में जाकर कालकेय नामक असंख्य राक्षसों का वध किया और वहाँ देवदत्त नामक शंख प्राप्त किया; अतः इस पृथ्वी पर उनसे बढ़कर कौन है?
 
He went to Indraloka and killed innumerable demons named Kalkeya and obtained a conch named Devadatta there; so who is greater than him on this earth?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)