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mahabharat 8.79.57: वह कंकपत्रों से युक्त बहुत से बाणों को एक ही बाण मानकर शीघ्रतापूर्वक धनुष पर चढ़ाकर उन्हें छोड़ देता है। वे अमोघ बाण एक कोस की दूरी तय करके गिर पड़ते हैं; अतः इस पृथ्वी पर उसके समान योद्धा कौन है?॥ 57॥   |   mahabharat अध्याय 8.79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  8.79.57 
गृह्णात्यनेकानपि कङ्कपत्रा-
नेकं यथा तान् प्रतियोज्य चाशु।
ते क्रोशमात्रे निपतन्त्यमोघा:
कस्तेन योधोऽस्ति सम: पृथिव्याम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
वह कंकपत्रों से युक्त बहुत से बाणों को एक ही बाण मानकर शीघ्रतापूर्वक धनुष पर चढ़ाकर उन्हें छोड़ देता है। वे अमोघ बाण एक कोस की दूरी तय करके गिर पड़ते हैं; अतः इस पृथ्वी पर उसके समान योद्धा कौन है?॥ 57॥
 
He takes in his hand many arrows having leaves of Kanka as if they were just one arrow and quickly places them all on the bow and shoots them. Those infallible arrows fall after travelling a distance of one kos; therefore, who is there on this earth who is a warrior like him?॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)