श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  8.79.55 
रणे चरत्येष रथप्रवीर:
सितैर्हयै: कौरवराजपुत्र:।
स वाद्य मां नेष्यति कृच्छ्रमेतत्
कर्णस्यान्तादेतदन्तास्तु सर्वे॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
महारथियों में प्रधान वीर कौरव राजकुमार अर्जुन अपने श्वेत घोड़े पर सवार होकर युद्धभूमि में विचरण कर रहे हैं। आज वे मुझे मृत्यु के संकट में डाल देंगे और यदि मैं कर्ण मारा गया, तो कौरव सेना के अन्य समस्त योद्धाओं का भी विनाश निश्चित है ॥ 55॥
 
The brave Kaurava prince Arjuna, the chief of charioteers, is roaming the battlefield on his white horse. Today he will put me in danger of death and if I, Karna, am killed, then the destruction of all the other warriors of the Kaurava army is also certain. ॥ 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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