श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  8.79.53 
शल्य उवाच
अजय्यमेनं प्रवदन्ति युद्धे
महारथा: कर्ण रथप्रवीरम्।
एकाकिनं किमु कृष्णाभिगुप्तं
विजेतुमेनं क इहोत्सहेत॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
शल्य ने कहा, "कर्ण! यदि महारथियों में प्रधान अर्जुन अकेला भी हो, तो भी महारथी उसे युद्ध में अजेय कहते हैं। और इस समय तो वह श्रीकृष्ण द्वारा रक्षित है। ऐसी स्थिति में उसे परास्त करने का साहस कौन कर सकता है?"
 
Shalya said, 'Karna! Even if Arjuna, the chief of charioteers, is alone, the great charioteers call him invincible in the war. And at present he is protected by Shri Krishna. In such a condition, who can dare to defeat him?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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