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श्लोक 8.79.51  |
कृष्णौ च पुरुषव्याघ्र तत: सत्यं ब्रवीमि ते।
नाहत्वा युधि तौ वीरौ व्यपयास्ये कथंचन॥ ५१॥ |
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| अनुवाद |
| हे नरसिंह! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि मैं युद्धस्थल में उन दोनों वीरों श्रीकृष्ण और अर्जुन को मारे बिना किसी प्रकार पीछे नहीं हटूँगा॥51॥ |
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| O lion of men! I tell you the truth that I will not retreat in any way without killing those two brave men, Shri Krishna and Arjun, on the battlefield. ॥ 51॥ |
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