कर्ण उवाच
प्रकृतिस्थोऽसि मे शल्य इदानीं सम्मतस्तथा।
प्रतिभासि महाबाहो मा भैषीस्त्वं धनंजयात्॥ ४९॥
अनुवाद
कर्ण ने कहा- शल्य! इस समय आप अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित हैं और मेरी बात से सहमत प्रतीत होते हैं। हे महाबाहो! अर्जुन से मत डरो।
Karna said- Shalya! At this time you are established in your true form and seem to be agreeing with me. O mighty-armed one! Do not be afraid of Arjuna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥