श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  8.79.45 
द्रवतामथ तेषां तु नान्योऽस्ति युधि मानव:।
भयहा यो भवेद् वीरस्त्वामृते सूतनन्दन॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
सुतनन्दन! आपके अतिरिक्त इस रणभूमि में कोई ऐसा वीर नहीं है जो भागते हुए राजाओं का भय दूर कर सके।
 
Sutanadanandan! Apart from you there is no brave man in this battlefield who can dispel the fear of those fleeing kings. 45.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd