श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  8.79.40 
न चास्य रक्षां पश्यामि पार्श्वतो न च पृष्ठत:।
एक एवाभियाति त्वां पश्य साफल्यमात्मन:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
मैं देख रहा हूँ कि उनकी रक्षा का कोई प्रबन्ध न तो बगल से हुआ है और न पीछे से। वे तुम पर ही आक्रमण कर रहे हैं; अतः देखो, तुम्हें सफलता का कैसा अद्भुत अवसर मिला है॥40॥
 
‘I see that no arrangements have been made to protect them from the sides or the rear. They are attacking you alone; so see, what a wonderful opportunity you have got for your success.॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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