| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस » श्लोक 35-37 |
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| | | | श्लोक 8.79.35-37  | विरथं धर्मराजं तु दृष्ट्वा सुदृढविक्षतम्।
शिखण्डिनं सात्यकिं च धृष्टद्युम्नं च पार्षतम्॥ ३५॥
द्रौपदेयान् युधामन्युमुत्तमौजसमेव च।
नकुलं सहदेवं च भ्रातरौ द्वौ समीक्ष्य च॥ ३६॥
सहसैकरथ: पार्थस्त्वामभ्येति परंतप:।
क्रोधरक्तेक्षण: क्रुद्धो जिघांसु: सर्वपार्थिवान्॥ ३७॥ | | | | | | अनुवाद | | तुमने धर्मराज युधिष्ठिर को बुरी तरह घायल करके उन्हें रथहीन कर दिया है। शिखंडी, द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न, सात्यकि, द्रौपदी के पुत्र उत्तमौजा, युधमन्यु तथा दोनों भाई नकुल और सहदेव भी तुम्हारे द्वारा बुरी तरह घायल कर दिए गए हैं। यह सब देखकर शत्रुओं को संताप देने वाले कुंतीपुत्र अर्जुन अत्यंत क्रोधित हो गए हैं। क्रोध से उनकी आँखें रक्त-सी लाल हो गई हैं, अतः समस्त राजाओं का वध करने की इच्छा से वे अपने एकमात्र रथ के साथ सहसा तुम्हारी ओर आ रहे हैं।' | | | | ‘You have severely wounded Dharmaraja Yudhishthira and left him without a chariot. Shikhandi, Drupada's son Dhrishtadyumna, Satyaki, Draupadi's sons, Uttamauja, Yudhmanyu and both the brothers Nakula and Sahadeva have also been badly wounded by you. Seeing all this, Kunti's son Arjuna, who torments the enemies, has become very angry. His eyes have turned blood red with anger, so with the desire to kill all the kings, he is suddenly coming towards you with his only chariot. | | ✨ ai-generated | | |
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