श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  8.79.33 
वर्जयन् सर्वसैन्यानि त्वरते हि धनंजय:।
त्वदर्थमिति मन्येऽहं यथास्योदीर्यते वपु:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इस समय अर्जुन का शरीर जिस प्रकार व्याकुल हो रहा है, उससे मैं समझता हूँ कि वह अपनी समस्त सेनाओं को छोड़कर आपके पास पहुँचने के लिए शीघ्रता कर रहा है ॥ 33॥
 
The way Arjuna's body is agitated at this moment, I understand that he is leaving all his armies and is in a hurry to reach you. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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