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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस
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श्लोक 32
श्लोक
8.79.32
एषा विदीर्यते सेना धार्तराष्ट्री समन्तत:।
अर्जुनस्य भयात् तूर्णं निघ्नत: शात्रवान् बहून्॥ ३२॥
अनुवाद
अर्जुन थोड़े ही समय में बहुत से शत्रुओं का संहार कर देता है, इसलिए उसके भय से दुर्योधन की सेना सब ओर से तितर-बितर होकर भाग रही है॥ 32॥
Arjuna kills many enemies in a short time, so out of fear of him, Duryodhan's army is scattered from all sides and is fleeing.॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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