श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.79.31 
त्वामभिप्रेप्सुरायाति कर्ण निघ्नन् वरान् रथान्।
असह्यमानो राधेय तं याहि प्रति भारत॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राधापुत्र कर्ण! अर्जुन अनेक महारथियों का संहार करता हुआ तुम्हें लेने यहाँ आ रहा है। वह शत्रुओं के लिए असह्य है। तुम्हें इस भरतवंशी वीर योद्धा का सामना करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।
 
Radha's son Karna! Arjuna is coming here to get you, killing many great charioteers. He is unbearable for the enemies. You should go ahead to face this brave warrior of Bharatvanshi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)