श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.79.27 
निरस्तजिह्वानेत्रान्ता वाजिन: सह सादिभि:।
पतिता: पात्यमानाश्च क्षितौ क्षीणा विशेरते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ये कौरव पक्ष के घोड़े अपने सवारों सहित घायल होकर अर्जुन द्वारा गिराए जा रहे हैं। इनकी जीभ और आँखें बाहर निकल आई हैं। ये पृथ्वी पर गिरकर सो रहे हैं॥ 27॥
 
‘These Kaurava side's horses along with their riders are wounded and are being thrown down by Arjun. Their tongues and eyes have come out. They have fallen and are sleeping on the earth.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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