श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  8.79.26 
एते परिघसंकाशा: पुण्यगन्धानुलेपना:।
उद्धता रणशूराणां पात्यन्ते सायुधा भुजा:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पैरों के समान मोटे और पवित्र एवं सुगन्धित चन्दन से लिपटे हुए शस्त्रधारी योद्धाओं की उठी हुई भुजाएँ काटकर फेंकी जा रही हैं॥ 26॥
 
The raised arms of the warriors, armed with weapons, which are as thick as legs and are smeared with the sacred and fragrant sandalwood, are being cut off and thrown away.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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