श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.79.25 
विशालायतताम्राक्षै: पूर्णचन्द्रनिभाननै:।
एषा भू: कीर्यते राज्ञां शिरोभिरपलायिनाम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यह रणभूमि उन राजाओं के कटे हुए सिरों से आच्छादित हो रही है जो युद्ध से कभी पीछे नहीं हटते। उन सिरों की आँखें बड़ी-बड़ी और लाल हैं तथा उनके मुख पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर हैं॥ 25॥
 
‘This battlefield is being covered with the severed heads of kings who never retreat from a war. The eyes of those heads are large and red and their faces are as beautiful as the full moon.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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