श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.79.21 
धनुर्ज्या चन्द्रताराङ्का पताकाकिङ्किणीयुता।
पश्य कर्णार्जुनस्यैषा सौदामन्यम्बरे यथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! देखो! यह अर्जुन के धनुष की डोरी है और यह रथ की ध्वजा है, जिस पर चन्द्रमा और तारे अंकित हैं तथा छोटी-छोटी घंटियाँ लगी हैं, यह आकाश में बिजली की तरह चमक रही है।
 
Karna! Look! This is the string of Arjuna's bow and the chariot's banner marked with the moon and stars and adorned with small bells, it is shining like lightning in the sky.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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