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mahabharat 8.78.62: राजेन्द्र! कर्ण के दो सत्यनिष्ठ और वीर पुत्र बचे थे। वे दोनों भाई क्रोधपूर्वक पाण्डव सेना को इधर-उधर से नष्ट करते रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  8.78.62 
कर्णपुत्रौ तु राजेन्द्र भ्रातरौ सत्यविक्रमौ।
निजघ्नाते बलं क्रुद्धौ पाण्डवानामितस्तत:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! कर्ण के दो सत्यनिष्ठ और वीर पुत्र बचे थे। वे दोनों भाई क्रोधपूर्वक पाण्डव सेना को इधर-उधर से नष्ट करते रहते थे।
 
Rajendra! Karna had two truthful and brave sons left. Those two brothers angrily used to destroy the Pandava army from here and there. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)