Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.78.57-59h: महाराज! इस प्रकार शत्रुघ्न का संहार करने वाला महाधनुर्धर कर्ण शत्रुओं की पैदल सेना, घोड़ों, रथों और हाथियों को मारकर डटा रहा। जैसे मृत्यु समस्त प्राणियों को मारकर डटी रहती है, उसी प्रकार महाबली कर्ण सोमकों को मारकर युद्धभूमि में अकेला ही डटा रहा। | mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमेतन्महाराज नरवाजिरथद्विपान्॥ ५७॥
हत्वा तस्थौ महेष्वास: कर्णोऽरिगणसूदन:।
यथा भूतगणान् हत्वा कालस्तिष्ठेन्महाबल:॥ ५८॥
तथा स सोमकान् हत्वा तस्थावेको महारथ:।
अनुवाद
महाराज! इस प्रकार शत्रुघ्न का संहार करने वाला महाधनुर्धर कर्ण शत्रुओं की पैदल सेना, घोड़ों, रथों और हाथियों को मारकर डटा रहा। जैसे मृत्यु समस्त प्राणियों को मारकर डटी रहती है, उसी प्रकार महाबली कर्ण सोमकों को मारकर युद्धभूमि में अकेला ही डटा रहा।
Maharaj! In this way, the great archer Karna, the destroyer of Shatrughan, stood firm after killing the enemy's infantry, horses, chariots and elephants. Just as death stands firm after killing all living beings, in the same way, the mighty warrior Karna stood firm alone on the battlefield after killing the Somakas. 57-58 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥