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mahabharat 8.78.56-57h: इस प्रकार शत्रुओं को जलाता हुआ कर्ण मध्याह्न के सूर्य के समान दहक रहा था। उस समय उसकी ओर देखना कठिन था। उस वीर सारथीपुत्र का शरीर काल और अंतक के समान शोभायमान हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  8.78.56-57h 
आदित्य इव मध्याह्ने दुर्निरीक्ष्य: परंतप:॥ ५६॥
कालान्तकवपु: शूर: सूतपुत्रोऽभ्यराजत।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शत्रुओं को जलाता हुआ कर्ण मध्याह्न के सूर्य के समान दहक रहा था। उस समय उसकी ओर देखना कठिन था। उस वीर सारथीपुत्र का शरीर काल और अंतक के समान शोभायमान हो रहा था।
 
Thus, Karna, who was burning his enemies, was burning like the mid-day sun. It was difficult to look at him at that time. The body of the valiant charioteer's son was looking as graceful as Kaal and Antaka. 56 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)