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mahabharat 8.78.53-54h: महाराज! शत्रुओं को पीड़ा देने वाले श्रेष्ठ पुरुषोत्तम राधापुत्र कर्ण ने युद्धभूमि से लौटते हुए योद्धाओं को बार-बार भगाया। 53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  8.78.53-54h 
तान् निवृत्तान् रणे शूरान् राधेय: शत्रुतापन:॥ ५३॥
अनेकशो महाराज बभञ्ज पुरुषर्षभ:।
 
 
अनुवाद
महाराज! शत्रुओं को पीड़ा देने वाले श्रेष्ठ पुरुषोत्तम राधापुत्र कर्ण ने युद्धभूमि से लौटते हुए योद्धाओं को बार-बार भगाया। 53 1/2॥
 
Maharaj! Radha's son Karna, the best man who tormented the enemies, repeatedly chased away those returning warriors from the battlefield. 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)