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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन
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श्लोक 44-45h
श्लोक
8.78.44-45h
विषमं च समं चैव हतैरश्वपदातिभि:॥ ४४॥
रथैश्च कुञ्जरैश्चैव न प्राज्ञायत किञ्चन।
अनुवाद
यह स्थान मृत घोड़ों, पैदल सैनिकों, रथों और हाथियों से भरा हुआ था, इसलिए इलाके की पहचान नहीं हो सकी।
The place was filled with dead horses, infantry, chariots and elephants, so the terrain could not be identified.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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