श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  8.78.4-5h 
यथाप्रतिज्ञं योधानां राधेय: कृतवानपि।
कुरूणामथ सर्वेषां कर्ण: शत्रुनिषूदन:॥ ४॥
शर्म वर्म प्रतिष्ठा च जीविताशा च संजय।
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन राधापुत्र कर्ण ने भी अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार सब कुछ किया। संजय! वह समस्त कौरव योद्धाओं का कृपापात्र आश्रयदाता, कवच के समान रक्षक, प्रतिष्ठा और जीवन का आशास्रोत था।
 
Shatrusudana Radhaputra Karna also did everything according to his promise. Sanjay! He was the benevolent shelter of all the Kaurava warriors, the protector like a shield, the hope of prestige and life. 4 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)