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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  8.78.38-39h 
यथौघ: पर्वतश्रेष्ठमासाद्याभिप्रदीर्यते॥ ३८॥
तथा तत् पाण्डवं सैन्यं कर्णमासाद्य दीर्यते।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार जल का विशाल प्रवाह ऊँचे पर्वत से टकराकर अनेक धाराओं में विभक्त हो जाता है, उसी प्रकार कर्ण के पास पहुँचकर पाण्डव सेना तितर-बितर हो गई।
 
Just as a great flow of water gets divided into many streams on hitting a high mountain, in the same way the Pandava army got dispersed on reaching Karna. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)