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mahabharat 8.78.37-38h: राधापुत्र शत्रुसूदन ने एक बार फिर ऐसा अद्भुत पराक्रम दिखाया कि समस्त पाण्डव योद्धा उसकी ओर देख भी न सके। 37 1/2   |   mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  8.78.37-38h 
तत्राद्भुतं पुनश्चक्रे राधेय: शत्रुकर्शन:॥ ३७॥
यदेनं पाण्डवा: सर्वे न शेकुरभिवीक्षितुम्।
 
 
अनुवाद
राधापुत्र शत्रुसूदन ने एक बार फिर ऐसा अद्भुत पराक्रम दिखाया कि समस्त पाण्डव योद्धा उसकी ओर देख भी न सके। 37 1/2
 
Shatrusudan, son of Radha, once again displayed such amazing prowess that all the Pandava warriors could not even look at him. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)