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mahabharat 8.78.35-36h: कर्ण के धनुष से छूटे हुए तीखे बाणों से मारे गये पांचालों का महान् हाहाकार उस महायुद्ध में गूँजने लगा।   |   mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  8.78.35-36h 
तत्राक्रन्दो महानासीत् पञ्चालानां महारणे॥ ३५॥
वध्यतां सायकैस्तीक्ष्णै: कर्णचापवरच्युतै:।
 
 
अनुवाद
कर्ण के धनुष से छूटे हुए तीखे बाणों से मारे गये पांचालों का महान् हाहाकार उस महायुद्ध में गूँजने लगा।
 
The great cries of the Panchalas who were killed by the sharp arrows shot from Karna's bow started echoing in that great war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)