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mahabharat 8.78.32-33h: धृतराष्ट्र के महान धनुर्धर पुत्र ने समस्त धनुर्धरों और सारथिओं में श्रेष्ठ नरोत्तम कर्ण की प्रशंसा करनी आरम्भ की।   |   mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  8.78.32-33h 
अपूजयन् महेष्वासा धार्तराष्ट्रा नरोत्तमम्॥ ३२॥
कर्णं रथवरश्रेष्ठं श्रेष्ठं सर्वधनुष्मताम्।
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र के महान धनुर्धर पुत्र ने समस्त धनुर्धरों और सारथिओं में श्रेष्ठ नरोत्तम कर्ण की प्रशंसा करनी आरम्भ की।
 
The great archer son of Dhritarashtra started praising Narottam Karna, the best among all the archers and charioteers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)