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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  8.78.31-32h 
तत्र भारत कर्णस्य लाघवेन महात्मन:॥ ३१॥
तुतुषुर्देवता: सर्वा: सिद्धाश्च सह चारणै:।
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! वहाँ महाहृदयी कर्ण की चपलता देखकर सिद्ध, चारण और समस्त देवतागण बहुत प्रसन्न हुए।
 
Bharatanandan! Seeing the agility of the great-hearted Karna there, the Siddhas, the Charanas and all the Gods were very pleased.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)