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mahabharat 8.78.22-23h: हे भरतश्रेष्ठ! राधापुत्र कर्ण ने उन सबको पाँच-पाँच बाणों से घायल कर दिया। फिर उसने सात्यकि के ध्वज और धनुष को काटकर उनकी छाती में नौ बाणों से प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  8.78.22-23h 
तान् प्रत्यविध्यद् राधेय: पञ्चभि: पञ्चभि: शरै:।
सात्यकेस्तु धनुश्छित्त्वा ध्वजं च भरतर्षभ॥ २२॥
तं तथा नवभिर्बाणैराजघान स्तनान्तरे।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! राधापुत्र कर्ण ने उन सबको पाँच-पाँच बाणों से घायल कर दिया। फिर उसने सात्यकि के ध्वज और धनुष को काटकर उनकी छाती में नौ बाणों से प्रहार किया।
 
O best of the Bharatas! Radha's son Karna wounded them all with five arrows each. Then he cut Satyaki's flag and bow and struck them in the chest with nine arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)