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mahabharat 8.78.16-17h: शिखण्डी, भीमसेन, द्रुपदकुमार धृष्टद्युम्न, नकुल-सहदेव, द्रौपदी के पाँचों पुत्र और सात्यकि ने अपने बाणों की वर्षा से राधापुत्र कर्ण को मार डालने की इच्छा से उसे चारों ओर से घेर लिया। 16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 78: कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  8.78.16-17h 
तं शिखण्डी च भीमश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:।
नकुल: सहदेवश्च द्रौपदेयाश्च सात्यकि:॥ १६॥
परिवव्रुर्जिघांसन्तो राधेयं शरवृष्टिभि:।
 
 
अनुवाद
शिखण्डी, भीमसेन, द्रुपदकुमार धृष्टद्युम्न, नकुल-सहदेव, द्रौपदी के पाँचों पुत्र और सात्यकि ने अपने बाणों की वर्षा से राधापुत्र कर्ण को मार डालने की इच्छा से उसे चारों ओर से घेर लिया। 16 1/2॥
 
Shikhandi, Bhimsen, Drupadakumar Dhrishtadyumna, Nakul-Sahadeva, the five sons of Draupadi and Satyaki surrounded him from all sides with the desire to kill Radha's son Karna with the shower of their arrows. 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)