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mahabharat 8.77.67: उस समय पुरुषों में श्रेष्ठ शकुनि उस अश्वरहित रथ को छोड़कर क्रोध से लाल नेत्रों से युक्त, गहरी साँस लेते हुए तथा धनुष को घुमाते हुए तुरंत ही भूमि पर खड़ा हो गया।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  8.77.67 
हताश्वं रथमुत्सृज्य त्वरमाणो नरोत्तम:।
तस्थौ विस्फारयंश्चापं क्रोधरक्तेक्षण: श्वसन्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उस समय पुरुषों में श्रेष्ठ शकुनि उस अश्वरहित रथ को छोड़कर क्रोध से लाल नेत्रों से युक्त, गहरी साँस लेते हुए तथा धनुष को घुमाते हुए तुरंत ही भूमि पर खड़ा हो गया।
 
At that time, that best of men, Shakuni, leaving that horseless chariot, immediately stood on the ground, drawing deep breaths and twirling his bow, with his eyes red with anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)