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mahabharat 8.77.63-64h: महाराज! यह देखकर धृतराष्ट्र के पुत्र सब ओर से गर्जना करने लगे; किन्तु भीमसेन उन महारथियों की गर्जना सहन न कर सके।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  8.77.63-64h 
अथोत्क्रुष्टं महाराज धार्तराष्ट्रै: समन्तत:॥ ६३॥
न तु तं ममृषे भीम: सिंहनादं तरस्विनाम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! यह देखकर धृतराष्ट्र के पुत्र सब ओर से गर्जना करने लगे; किन्तु भीमसेन उन महारथियों की गर्जना सहन न कर सके।
 
Maharaj! Seeing this, the sons of Dhritarashtra roared from all sides; but Bhimasena could not bear the roar of those mighty warriors. 63 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)