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mahabharat 8.77.61-62h: राजा! शकुनि ने क्रोध में भरकर अपने हाथ से स्वर्णजटित भाला पकड़ा और भीमसेन पर फेंका।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 61-62h
 
 
श्लोक  8.77.61-62h 
ततस्तामेव संगृह्य शक्तिं कनकभूषणाम्॥ ६१॥
भीमसेनाय चिक्षेप क्रुद्धरूपो विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
राजा! शकुनि ने क्रोध में भरकर अपने हाथ से स्वर्णजटित भाला पकड़ा और भीमसेन पर फेंका।
 
King! Shakuni, filled with anger, caught hold of the gold-adorned spear in his hand and threw it at Bhimasena. 61 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)