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mahabharat 8.77.59-60h: महाराज! तब महाबली भीमसेन ने क्रोध में भरकर युद्धस्थल में शकुनि पर सोने का धनुष चढ़ाकर लोहे का पराक्रम चलाया।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  8.77.59-60h 
तत: क्रुद्धो महाराज भीमसेन: प्रतापवान्॥ ५९॥
शक्तिं चिक्षेप समरे रुक्मदण्डामयस्मयीम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब महाबली भीमसेन ने क्रोध में भरकर युद्धस्थल में शकुनि पर सोने का धनुष चढ़ाकर लोहे का पराक्रम चलाया।
 
Maharaj! Then the mighty Bhimasena, filled with anger, hurled an iron might with a golden bow at Shakuni in the battle arena. 59 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)