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mahabharat 8.77.57-58h: महाराज! शकुनि ने मुड़े हुए दो बाणों से भीमसेन के सारथि को घायल कर दिया और सात बाणों से स्वयं भीमसेन को भी घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  8.77.57-58h 
तैस्तस्य तु महाराज भल्लै: संनतपर्वभि:॥ ५७॥
द्वाभ्यां स सारथिं ह्यार्च्छद् भीमं सप्तभिरेव च।
 
 
अनुवाद
महाराज! शकुनि ने मुड़े हुए दो बाणों से भीमसेन के सारथि को घायल कर दिया और सात बाणों से स्वयं भीमसेन को भी घायल कर दिया।
 
Maharaj! With two of those arrows having bent ends Shakuni injured Bhimasena's charioteer and with the seven he injured Bhimasena himself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)