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mahabharat 8.77.56-57h: टूटे हुए धनुष को फेंककर, महाबली सुबलपुत्र शकुनि ने बड़ी तेजी से दूसरा धनुष उठाया और उससे सोलह बाण छोड़े।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  8.77.56-57h 
तदपास्य धनुश्छिन्नं सौबलेय: प्रतापवान्॥ ५६॥
अन्यदादाय वेगेन धनुर्भल्लांश्च षोडश।
 
 
अनुवाद
टूटे हुए धनुष को फेंककर, महाबली सुबलपुत्र शकुनि ने बड़ी तेजी से दूसरा धनुष उठाया और उससे सोलह बाण छोड़े।
 
Throwing away the broken bow, the mighty Shakuni, son of Subala, took up another bow with great speed and shot sixteen arrows with it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)