vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना
»
श्लोक 55-56h
श्लोक
8.77.55-56h
तस्मिन् निपतिते भूमौ भीम: क्रुद्धो विशाम्पते॥ ५५॥
धनुश्चिच्छेद भल्लेन सौबलस्य हसन्निव।
अनुवाद
राजन! उस बाण के गिर जाने पर भीमसेन ने क्रोधित होकर हँसते हुए भाला चलाया और शकुनि का धनुष काट डाला।
King! After that arrow fell down, Bhimasena laughing angrily shot a spear and cut off Shakuni's bow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×