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mahabharat 8.77.54-55h: महाराज! शत्रुओं को त्रास देने वाला महाबली शकुनि बड़ा ही कुशल था। उसने उस भयंकर बाण को, जो उसकी ओर आ रहा था, सात टुकड़ों में तोड़ डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  8.77.54-55h 
तमायान्तं शरं घोरं शकुनि: शत्रुतापन:॥ ५४॥
चिच्छेद सप्तधा राजन् कृतहस्तो महाबल:।
 
 
अनुवाद
महाराज! शत्रुओं को त्रास देने वाला महाबली शकुनि बड़ा ही कुशल था। उसने उस भयंकर बाण को, जो उसकी ओर आ रहा था, सात टुकड़ों में तोड़ डाला।
 
King! The mighty Shakuni who tormented his enemies was an expert. He broke that dreadful arrow into seven pieces as it came towards him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)