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mahabharat 8.77.51-52h: राजा! भीमसेन उसके तीखे बाणों से रोके जाने पर उसकी ओर लौट पड़े। उस समय शकुनि ने उनकी बाईं पसली और छाती में शिला पर तीखे किए हुए, सोने के पंख वाले अनेक बाणों से प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  8.77.51-52h 
संन्यवर्तत तं भीमो वार्यमाण: शितै: शरै:।
शकुनिस्तस्य राजेन्द्र वामपार्श्वे स्तनान्तरे॥ ५१॥
प्रेषयामास नाराचान् रुक्मपुङ्खान् शिलाशितान्।
 
 
अनुवाद
राजा! भीमसेन उसके तीखे बाणों से रोके जाने पर उसकी ओर लौट पड़े। उस समय शकुनि ने उनकी बाईं पसली और छाती में शिला पर तीखे किए हुए, सोने के पंख वाले अनेक बाणों से प्रहार किया।
 
King! Bhimasena turned back towards him after being stopped by his sharp arrows. At that time Shakuni struck him with many arrows having wings of gold and sharpened on a rock in his left rib and chest. 51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)