श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.77.46 
यतो यत: पाण्डवेय: प्रविष्टो रथसत्तम:।
ततस्ततोऽघातयत योधान् शतसहस्रश:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
रथियों में श्रेष्ठ पाण्डवपुत्र भीमसेन जिस ओर भी जाते, वहाँ लाखों योद्धाओं का संहार कर देते।
 
Whichever direction Pandava's son Bhimasena, the best among charioteers, would go, he would kill lakhs of warriors there. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)