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mahabharat 8.77.25: वायुपुत्र भीमसेन पवन के समान वेगवान थे। वे बल और पराक्रम में वायु के समान ही थे। वे उस रणभूमि में वायु के समान विचरण करने लगे॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.77.25 
स वायुवीर्यप्रतिमो वायुवेगसमो जवे।
वायुवद् व्यचरद् भीमो वायुपुत्र: प्रतापवान्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वायुपुत्र भीमसेन पवन के समान वेगवान थे। वे बल और पराक्रम में वायु के समान ही थे। वे उस रणभूमि में वायु के समान विचरण करने लगे॥ 25॥
 
The mighty son of Vayu, Bhimasena was as fast as the wind. He was equal to the wind in strength and valour. He started moving around in that battlefield like the wind.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)